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अब पूरे देश में लागू होगा एनआरसी: गृहमंत्री:-

अब पूरे देश में लागू होगा एनआरसी: गृहमंत्री:- संसद के शीतकालीन सत्र में गृह मंत्री ने बताया केंद्र सरकार असम के बाद पूरे देश में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर एनआरसी लागू करेगी, राज्य सभा में बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह कहा कि अब यह पूरे देश में लागू होगा और इसे लागू करने में धर्म के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं होगा, इसलिए किसी नागरिक को इससे डरने की जरूरत नहीं है ,यह एक सामान्य प्रक्रिया है जिससे देश के नागरिकों की पहचान सुनिश्चित की जाती है ,

श्रअमित शाह ने एनआरसी और नागरिक संशोधन विधेयक में स्पष्ट किया कि दोनों में फर्क है ,लोगों में भ्रांति नहीं रहनी चाहिए कि एनआरसी धर्म विशेष को अलग-थलग करने के लिए है यह पूरे देश में लागू होगा और इससे कोई नागरिक छूटेगा नहीं चाहे वह भी धर्म का क्यों ना हो ,इसके तहत धर्म के आधार पर किसी को अलग करने का कानूनी प्रावधान नहीं है, उन्होंने असम मुद्दे पर कहा कि जिन लोगों का नाम अंतिम सूची में नहीं है वह न्यायाधिकरण में जा सकते हैं, जो कानूनी मदद की व्यवस्था करने में असमर्थ हैं उन्हें सरकार वकील मुहैया कराएगी, 31 अगस्त को जारी एनआरसी की अंतिम सूची में असम में 19 लाख लोगों का नाम शामिल नहीं है,

       कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन ने शाह के लोकसभा चुनाव के भाषण के आधार पर उच्च सदन में कुछ सवाल उठाया था कि मुसलमानों को छोड़कर अन्य धर्म के शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात इसमें थी, उन्होंने कहा इससे मुस्लिमों में असुरक्षा की भावना है, विपक्ष के सवालों पर जवाब देते हुए उच्च सदन में अमित शाह ने कहा एनआरसी और नागरिकता संशोधन विधेयक दो अलग प्रक्रिया है, नागरिकता संशोधन बिल में पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिमों को नागरिकता देने का प्रावधान है जिसमें हिंदू ,बौद्ध ,जैन ,सिख ,ईसाई और पारसी शरणार्थी शामिल हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में धर्म के आधार पर भेदभाव का शिकार होना पड़ता है इसलिए इन्हें नागरिकता संशोधन विधेयक बिल के तहत नागरिकता दी जाएगी, एनआरसी मुद्दे पर अमित शाह के बयान के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि वह इसे बंगाल में लागू नहीं करेंगी, उन्होंने कहा कुछ लोग एनआरसी के नाम पर प्रदेश में अशांति फैलाना चाहते हैं, लेकिन मैं बंगाल में ऐसा नहीं होने दूंगी धर्म के नाम पर विभाजन नहीं हो सकता, आंखिर असम में 14 लाख हिंदू और बंगाली एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर क्यों हो गए?

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