अयोध्या राम मंदिर: “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र” ट्रस्ट का गठन:-

अयोध्या राम मंदिर: “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र” ट्रस्ट का गठन:- सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अयोध्या में बनने वाला श्री राम मंदिर के लिए केंद्र सरकार ने “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र” ट्रस्ट का गठन कर दिया है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह लोकसभा में इस ट्रस्ट के नाम का ऐलान किया और शाम को ट्रस्ट की अधिग्रहित जमीन और सभी चल अचल संपत्तियां ट्रस्ट को हस्तांतरित भी कर दी गई, श्री राम जन्मभूमि जन्मभूमि न्यास का भी बिलय इसी ट्रस्ट में कर दिया गया,

पीएम मोदी ने लोकसभा में यह ऐलान करते हुए कहा राम मंदिर निर्माण मेरे दिल के बेहद करीब है ,सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक 67.703 एकड़ अधिकृत पूरी जमीन जिसमें भीतरी व बाहरी आंगन शामिल हैं उसे नवगठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा जाएगा ,यह ट्रस्ट अयोध्या में भव्य और दिव्य श्री राम मंदिर निर्माण और संबंधित विषयों पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा ,प्रधानमंत्री ने बताया कि गहन विचार-विमर्श के बाद अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित 5 एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का अनुरोध किया गया है, जिस पर यूपी सरकार से सहमति मिल गई है, 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए 3 माह में ट्रस्ट बनाने के समय सीमा 9 फरवरी को समाप्त हो रही थी ,प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन की शुरुआत में कहा, 9 नवंबर को मैं करतारपुर कॉरिडोर के लिए पंजाब में था जब मैंने राम मंदिर पर इस ऐतिहासिक निर्णय को सुना, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार श्री राम जन्म स्थली पर मंदिर बनाने और उससे जुड़े सभी विषयों के लिए विशेष योजना बनाई गई है, कोर्ट के आदेश के अनुसार एक स्वायत्त ट्रस्ट बनाने का प्रस्ताव पारित किया है, प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद लोकसभा में जय श्रीराम के नारे लगने लगे ,इस ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य होंगे इसमें 10 स्थाई सदस्य और पांच पदेन सदस्य की नियुक्ति होगी ,प्रधानमंत्री ने कहा हिंदुस्तान में हर पंथ के लोग चाहे हिंदू, मुस्लिम ,सिख इसाई हो या बौद्ध ,पारसी जैन हो सब एक सब एक ही परिवार के सदस्य ,हर सदस्य का विकास हो वह सुखी रहें स्वस्थ रहें देश का विकास हो, इसी भावना के साथ मेरी सरकार सबका साथ सबका विकास के मंत्र पर चल रही है, आइए इस ऐतिहासिक क्षण में हम सभी भव्य मंदिर के लिए एक स्वर में अपना समर्थन दें,

प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया “जय श्री राम ” पीएम मोदी को प्रभु श्री राम के जन्म स्थान पर भव्य मंदिर बनाने के लिए स्वायत्त ट्रस्ट का गठन करने पर कोटिस: धन्यवाद , ट्रस्ट पूरी तरह स्वतंत्र और मंदिर निर्माण से जुड़े सभी निर्णय लेने में सक्षम होगा, जय श्री राम ,

प्रधानमंत्री के इस ऐलान के कुछ देर बाद ही सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश कैबिनेट की एक बैठक में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन भी तय कर दी गई, यह जमीन अयोध्या मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर सोहावल तहसील के धनीपुर गांव में रोनाही थाने के 200 मीटर के पीछे है, सुन्नी वक्फ बोर्ड को यह जमीन दी जाएगी ,अयोध्या के डीएम अनुज कुमार झा ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन के दस्तावेज भेज दिए गए हैं, वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैयद मोहम्मद शोएब ने कहा कि जमीन पर फैसले के लिए 24 फरवरी को बोर्ड की बैठक बुलाई गई है,

प्रधानमंत्री के द्वारा ट्रस्ट की घोषणा के बाद शाम तक इस ट्रस्ट के लिए सदस्यों नामों की भी घोषणा कर दी गई ,सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान का मुकदमा लड़ने वाले वरिष्ठ वकील के परासरण को मंदिर ट्रस्ट का पहला ट्रस्टी बनाया गया है, इस ट्रस्ट में शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद ,सरस्वती जगतगुरु माधवाचार्य आचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ, स्वामी गोविंद देव गिरि ,युगपुरुष परमानंद, डॉक्टर अनिल मिश्र, कामेश्वर चौपाल, बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, महंत दिनेंद्र दास सदस्य होंगे ,ट्रस्ट में केंद्र द्वारा नामित एक प्रतिनिधि ,बोर्ड ऑफ ट्रस्टी द्वारा नामित एक ट्रस्टी ,राज्य द्वारा नामित एक प्रतिनिधि और अयोध्या के कलेक्टर पदेन ट्रस्टी होंगे ,यदि वहां के कलेक्टर गैर हिंदू हैं तो अतिरिक्त कलेक्टर प्रशासन इस की नुमाइंदगी करेंगे, बिहार के रहने वाले दलित समाज के कामेश्वर चौपाल को भी इसमें स्थान दिया गया है, राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले चौपाल 1989 में मंदिर की पहली ईट रखने बालों में थे, कामेश्वर दो बार विधान परिषद सदस्य भी रह चुके हैं, वह श्री राम लोक संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक और बिहार भाजपा के महामंत्री भी रह चुके है |

विपक्ष ने प्रधानमंत्री के इस घोषणा के वक्त पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि दिल्ली चुनाव के मद्देनजर ट्रस्ट की घोषणा चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है लेकिन चुनाव आयोग ने कांग्रेसी के इस दलील को खारिज करते हुए इसे आचार संहिता का उल्लंघन मानने से इनकार कर दिया,

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