आर आरबीआई ने डीएचएफएल का बोर्ड भंग कर प्रशासक नियुक्त किया:-

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आरबीआई ने डीएचएफएल का बोर्ड भंग कर प्रशासक नियुक्त किया:- दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड डीएचएफएल का बोर्ड भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रशासनिक चिंताओं और कर्ज न चुकाने के चलते बुधवार को भंग कर दिया, इसके साथ ही इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंध निदेशक आर सुब्रमण्यकुमार को प्रशासक नियुक्त किया है ,यह दिवालिया कानून आईपीसी के कंपनी के समाधान की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है, इस कंपनी के पास यूपी पावर कारपोरेशन के 45 हजार कर्मचारियों का भविष्य निधि के 2268 करोड़ रुपए और इसका ब्याज भी फंसा हुआ है, देश की तीसरी सबसे बड़ी गिरवी ऋण दाता कंपनी डीएचएफएल पर कुछ दिनों से संकट के बादल मंडरा रहे है, याचे का सबसे बड़ा कारण ज्यादातर कर्ज़ डेवलपर्स को दिए और इसके पैसे रियल एस्टेट क्षेत्र में भी फंसे हुए इसका बाजार पूंजीकरण घटकर 623 करोड पर रह गया और इस कंपनी से निवेशकों का भरोसा भी टूट गया , कंपनी लगातार लघु अवधि की उधारी देती रही और जोखिम भरी परिसंपत्तियों में भी निवेश करती रही, जिसके कारण इससे यह संकट आया है, यूपी पावर कारपोरेशन ने बुधवार को मुंबई हाईकोर्ट में डीएचएफएल में कर्मचारियों की भविष्य निधि के जमा 2268 करोड़ रूपये और ब्याज निकासी की अनुमति मांगी, कारपोरेशन ने कोर्ट में कहा कि इसमें 45000 से ज्यादा कर्मचारियों का पैसा जमा है, यूपी सरकार ने दोषी अधिकारियों को गिरफ्तार किया है और इस पर जांच चल रही है, इस पर अगली सुनवाई 28 नवंबर को होनी है, डीएचएफएल ने कोर्ट में कहा धन निकासी पर रोक हटा दी जाए तो वह अनुबंध की शर्तों और नियमों के तहत कारपोरेशन को बकाया धनराशि लौटाने को तैयार है, और उसी शाम आरबीआई का यह आदेश आ गया, डीएचएफएल पर करीब 84000 करोड रुपए का कर्ज है जिसमें से केवल 38000 करोड रुपए बैंकों का देनदारी है बाकी पेंशन फंड म्युचुअल फंड राष्ट्रीय आवास बैंक और जमा कर्ताओं की रकम है, यह कर्ज एक लाख करोड़ रुपए तक का भी हो सकता है, दिवालिया कानून के तहत डीएचएफएल के समाधान की प्रक्रिया में म्यूचुअल फंड भी शामिल होंगे, म्यूच्यूअल फंड कंपनी के अंतर्गत आता है ,आरबीआई ने कहा कि दिवालिया कानून 2019 के तहत कंपनी के समाधान की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी और प्रशासक नियुक्त करने के लिए एनसीएलटी से अनुरोध किया जाएगा, यदि ऐसा होता है तो डीएचएफएल पहली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी होगी जिसका समाधान दिवालिया कानून के तहत किया जाएगा|

आर आरबीआई ने डीएचएफएल का बोर्ड भंग कर प्रशासक नियुक्त किया:- आरबीआई ने डीएचएफएल का बोर्ड भंग कर प्रशासक नियुक्त किया:- दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड डीएचएफएल का बोर्ड भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रशासनिक चिंताओं और कर्ज न चुकाने के चलते बुधवार को भंग कर दिया, इसके साथ ही इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंध निदेशक आर सुब्रमण्यकुमार को प्रशासक नियुक्त किया है ,यह दिवालिया कानून आईपीसी के कंपनी के समाधान की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है,

इस कंपनी के पास यूपी पावर कारपोरेशन के 45 हजार कर्मचारियों का भविष्य निधि के 2268 करोड़ रुपए और इसका ब्याज भी फंसा हुआ है, देश की तीसरी सबसे बड़ी गिरवी ऋण दाता कंपनी डीएचएफएल पर कुछ दिनों से संकट के बादल मंडरा रहे है, याचे का सबसे बड़ा कारण ज्यादातर कर्ज़ डेवलपर्स को दिए और इसके पैसे रियल एस्टेट क्षेत्र में भी फंसे हुए इसका बाजार पूंजीकरण घटकर 623 करोड पर रह गया और इस कंपनी से निवेशकों का भरोसा भी टूट गया , कंपनी लगातार लघु अवधि की उधारी देती रही और जोखिम भरी परिसंपत्तियों में भी निवेश करती रही, जिसके कारण इससे यह संकट आया है, यूपी पावर कारपोरेशन ने बुधवार को मुंबई हाईकोर्ट में डीएचएफएल में कर्मचारियों की भविष्य निधि के जमा 2268 करोड़ रूपये और ब्याज निकासी की अनुमति मांगी, कारपोरेशन ने कोर्ट में कहा कि इसमें 45000 से ज्यादा कर्मचारियों का पैसा जमा है, यूपी सरकार ने दोषी अधिकारियों को गिरफ्तार किया है और इस पर जांच चल रही है, इस पर अगली सुनवाई 28 नवंबर को होनी है,
डीएचएफएल ने कोर्ट में कहा धन निकासी पर रोक हटा दी जाए तो वह अनुबंध की शर्तों और नियमों के तहत कारपोरेशन को बकाया धनराशि लौटाने को तैयार है, और उसी शाम आरबीआई का यह आदेश आ गया,
डीएचएफएल पर करीब 84000 करोड रुपए का कर्ज है जिसमें से केवल 38000 करोड रुपए बैंकों का देनदारी है बाकी पेंशन फंड म्युचुअल फंड राष्ट्रीय आवास बैंक और जमा कर्ताओं की रकम है, यह कर्ज एक लाख करोड़ रुपए तक का भी हो सकता है, दिवालिया कानून के तहत डीएचएफएल के समाधान की प्रक्रिया में म्यूचुअल फंड भी शामिल होंगे, म्यूच्यूअल फंड कंपनी के अंतर्गत आता है ,आरबीआई ने कहा कि दिवालिया कानून 2019 के तहत कंपनी के समाधान की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी और प्रशासक नियुक्त करने के लिए एनसीएलटी से अनुरोध किया जाएगा, यदि ऐसा होता है तो डीएचएफएल पहली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी होगी जिसका समाधान दिवालिया कानून के तहत किया जाएगा| दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड डीएचएफएल का बोर्ड भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रशासनिक चिंताओं और कर्ज न चुकाने के चलते बुधवार को भंग कर दिया, इसके साथ ही इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंध निदेशक आर सुब्रमण्यकुमार को प्रशासक नियुक्त किया है ,यह दिवालिया कानून आईपीसी के कंपनी के समाधान की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है,

इस कंपनी के पास यूपी पावर कारपोरेशन के 45 हजार कर्मचारियों का भविष्य निधि के 2268 करोड़ रुपए और इसका ब्याज भी फंसा हुआ है, देश की तीसरी सबसे बड़ी गिरवी ऋण दाता कंपनी डीएचएफएल पर कुछ दिनों से संकट के बादल मंडरा रहे है, याचे का सबसे बड़ा कारण ज्यादातर कर्ज़ डेवलपर्स को दिए और इसके पैसे रियल एस्टेट क्षेत्र में भी फंसे हुए इसका बाजार पूंजीकरण घटकर 623 करोड पर रह गया और इस कंपनी से निवेशकों का भरोसा भी टूट गया , कंपनी लगातार लघु अवधि की उधारी देती रही और जोखिम भरी परिसंपत्तियों में भी निवेश करती रही, जिसके कारण इससे यह संकट आया है, यूपी पावर कारपोरेशन ने बुधवार को मुंबई हाईकोर्ट में डीएचएफएल में कर्मचारियों की भविष्य निधि के जमा 2268 करोड़ रूपये और ब्याज निकासी की अनुमति मांगी, कारपोरेशन ने कोर्ट में कहा कि इसमें 45000 से ज्यादा कर्मचारियों का पैसा जमा है, यूपी सरकार ने दोषी अधिकारियों को गिरफ्तार किया है और इस पर जांच चल रही है, इस पर अगली सुनवाई 28 नवंबर को होनी है,

डीएचएफएल ने कोर्ट में कहा धन निकासी पर रोक हटा दी जाए तो वह अनुबंध की शर्तों और नियमों के तहत कारपोरेशन को बकाया धनराशि लौटाने को तैयार है, और उसी शाम आरबीआई का यह आदेश आ गया,

डीएचएफएल पर करीब 84000 करोड रुपए का कर्ज है जिसमें से केवल 38000 करोड रुपए बैंकों का देनदारी है बाकी पेंशन फंड म्युचुअल फंड राष्ट्रीय आवास बैंक और जमा कर्ताओं की रकम है, यह कर्ज एक लाख करोड़ रुपए तक का भी हो सकता है, दिवालिया कानून के तहत डीएचएफएल के समाधान की प्रक्रिया में म्यूचुअल फंड भी शामिल होंगे, म्यूच्यूअल फंड कंपनी के अंतर्गत आता है ,आरबीआई ने कहा कि दिवालिया कानून 2019 के तहत कंपनी के समाधान की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी और प्रशासक नियुक्त करने के लिए एनसीएलटी से अनुरोध किया जाएगा, यदि ऐसा होता है तो डीएचएफएल पहली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी होगी जिसका समाधान दिवालिया कानून के तहत किया जाएगा|

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