धारा 370 -70 साल बाद कश्मीर से आजाद :अब एक निशान एक संविधान:-

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धारा 370 -70 साल बाद कश्मीर से आजाद :अब एक निशान एक संविधान:-

धारा 370 -70 साल बाद कश्मीर से आजाद :अब एक निशान एक संविधान:- जम्मू कश्मीर दो हिस्सों में बटा, अब यह राज्य नहीं केंद्र शासित प्रदेश होगा पहला जम्मू-कश्मीर व दूसरा लद्दाख: अद्भुत एवं ऐतिहासिक फैसला जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटा दिया गया देश के लिए सावन का यह तीसरा सोमवार भी ऐतिहासिक रहा जहां इस सावन में पहले सोमवार को chandrayaan-2 सफलतापूर्वक छोड़ा गया वहीं दूसरे सोमवार को तीन तलाक बिल पास हुआ अब तीसरे सोमवार को 70 सालों से चली आ रही कश्मीर की विकास में बाधक, धारा 370 से मुक्ति मिल गई ,देश के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा नरेंद्र मोदी सरकार ने साहसिक फैसला करते हुए जम्मू कश्मीर की स्वायत्तता जैसी विशेष दर्जा देने वाली वाली संविधान की विशेष उपबंध अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया, इस तरह 70 साल पुराने अनुच्छेद 370 से जुड़ा जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को विशेषाधिकार देने वाला अनुच्छेद 35a भी स्वत: खत्म हो गया ,इतना ही नहीं आजादी के 72 साल बाद कन्याकुमारी से कश्मीर तक देश में अब एक संविधान और एक निशान लागू हो गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी जनसभा में भी यह बात कही थी कि इस देश में दो निशान दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे, सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में यह ऐलान किया कि अनुच्छेद 370 राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर करने के साथ ही अधिसूचना के द्वारा खत्म हो गया है, उन्होंने जम्मू और कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 पेश करते हुए चार संकल्प प्रस्ताव पेश किए इसमें अनुच्छेद 370 के खंड एक को छोड़कर बाकी अनुच्छेद खत्म करने का संकल्प प्रस्ताव था साथ ही जम्मू-कश्मीर आरक्षण विधेयक भी पेश किया जिसे उच्च सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया ,सदन की कार्रवाई सुबह राज्यसभा में शुरू होते ही सभापति ने विशेषाधिकार प्रयोग करते हुए इसे पेश करने की अनुमति दी गृह मंत्री शाह ने राज्य सभा में कहा राष्ट्रपति को अनुच्छेद 370 के खंड 3 तहत के तहत इसे खत्म करने का अधिकार है, सारे सदस्य जान लें कि हमने किस धारा के तहत यह किया, सोमवार सुबह राष्ट्रपति ने अधिसूचना जारी की जो संवैधानिक आदेश है, जिसमें उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा का मतलब जम्मू कश्मीर की विधानसभा है, दरअसल संविधान सभा अब खत्म हो चुकी है इसके लिए उसके अधिकार विधानसभा में निहित होते हैं, वहां राज्यपाल शासन होने से विधानसभा के सारे अधिकार संसद के दोनों सदनों में निहित है ,राष्ट्रपति के इस आदेश को साधारण बहुमत से पारित कर सकते हैं| ऐसा पहली बार नहीं हुआ इसके पहले कांग्रेसी 1952 ,1962 और अनुच्छेद 370 में ऐसे ही संशोधन कर चुकी है |संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कोई कानूनी या संवैधानिक खामी नहीं है सरकार ने इसका सावधानी से अध्ययन किया है और जहां तक इसके राजनीतिक पक्ष का सवाल है इस पर मुझे कुछ नहीं कहना है |जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग करके एक अलग केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया है, इसमें कोई विधानसभा नहीं होगी |जहां तक सरकार द्वारा इसके राज्यसभा में पहले पेश करने का सवाल है तो यह सरकार की बड़ी रणनीति का हिस्सा रहा ,राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 पेश करना इस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, हालांकि पहले इस बिल को लोकसभा में पेश करने की योजना थी मगर बाद में यह तय हुआ कि राज्य सभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है और इस समय विपक्ष पूरी तरह से बटा हुआ है जबकि लोकसभा में सरकार के पास पर्याप्त बहुमत होने से इसे पास होने में कोई मुश्किल नहीं होगी, इसके बाद इस संकल्प और बिल को तत्काल राज्यसभा में पेश करने की रणनीति बनी राज्यसभा में हंगामे के बीच हुई चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि घाटी में खून खराबे के युग का अंत हुआ हमारा इरादा केंद्र शासित राज्य की व्यवस्था को लंबे समय तक बनाए रखने की नहीं है उचित समय आने पर हम इसे पूर्ण राज्य बना देंगे| जम्मू कश्मीर भारत का मुकुट मणि है इस बात से हमारा कोई मतभेद नहीं है, पंडित नेहरू ने कहा था कि, धारा 370 घिसते घिसते घिस जाएगा लेकिन कुछ लोगों ने 370 को संभाल कर रखा, जम्मू कश्मीर में गरीबी बेरोजगारी भ्रष्टाचार और आतंकवाद की जड़ अनुच्छेद 370 ही है ,कश्मीर के लोगों को 21वीं सदी में जीने का हक नहीं है? क्या उकसाने वालों के बच्चे लंदन और अमेरिका में पढ़ रहे हैं लेकिन घाटी के युवाओं को पढ़ने और आगे बढ़ने नहीं देना चाहते हैं , कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने संसद में कहा की अतिरिक्त सुरक्षा बल बल भेजे जाने के बाद से ही या आशंकाएं बढ़ रही थी थी की कुछ बड़ा करने की सरकार सोच रही है गृह मंत्री सदन में आए तो लगा जैसे एटम बम फट गया जम्मू कश्मीर के इतिहास की शुरुआत वहां के प्रधानमंत्री के साथ हुई थी लेकिन अब आपने उसे लेफ्टिनेंट गवर्नर पर लाकर खत्म कर दिया है ताकि आप चपरासी भी खुद नियुक्त कर सकें, वोट के लिए कश्मीर के टुकड़े कर दिए भाजपा ने संविधान की हत्या कर एक राज्य का इतिहास ही खत्म कर दिया| वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा आज लोकतंत्र खतरे में है आम लोगों की आजादी छीनी जा रही जा रही है नेताओं को नजरबंद करना धमकी दिलाना और संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करना यह सब भाजपा के अलोकतांत्रिक तरीके हैं |सपा 9 अगस्त को धरना देगी वही इस फैसले को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐतिहासिक और अत्यंत साहसिक निर्णय करार दिया, उन्होंने कहा कि कश्मीर को भारतीयता के सूत्र में पिरो कर सात दशकों से मां भारती की आकांक्षा को पूरी करने के लिए प्रधानमंत्री व गृहमंत्री मंत्री का कोटिस: अभिनंदन इस निर्णय से ऐतिहासिक भूल सुधारी गई है ,सरकार के इस फैसले को खेल-जगत ॉलीवुड से लेकर उद्योगपतियों तक सभी ने इस को सराहा है ,उद्योगपतियों ने कहा इतिहास इसे याद रखेगा अब जम्मू कश्मीर में भी विकास होगा उद्योग धंधे लगेंगे और लोगों को रोजगार मिलेगा इसके लिए अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी दोनों बधाई के पात्र हैं राज्यसभा में सरकार के इस बिल पर बहुजन समाज पार्टी अन्ना डीएमके, बीजू जनता दल आदि दलों ने इस पर सरकार का समर्थन किया वहीं कांग्रेश टीएमसी टीएमसी पीडीपी टीडीपी आदि दलों ने इस बिल का विरोध किया, इस बीच जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को केंद्र द्वारा खत्म किए जाने के बाद कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सोमवार देर रात शाम को पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस नेशनल कांफ्रेंस के नेता पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत चार नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया गिरफ्तार अन्य नेताओं में पीपुल्स कॉन्फ्रेंस प्रमुख सज्जाद गनी लोन व पूर्व मंत्री इमरान रजा अंसारी भी शामिल है इससे पहले रविवार को इन नेताओं को उनके ही घरों में नजरबंद कर दिया गया था गिरफ्तारी के बाद उमर अब्दुल्लाह महबूबा को हरी निवास गेस्ट हाउस ले जाया गया है और जम्मू व कश्मीर संभाग में सभी पार्टियों के प्रमुख नेताओं पूर्व मंत्री व पूर्व विधायकों को एहतियातन घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई है ,राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सुरक्षा हालात का जायजा लेने सोमवार को ही कश्मीर पहुंच गए महबूबा मुफ्ती ने कहा यह भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दिन है ,जम्मू कश्मीर के नेतृत्व ने 1947 में भारत के नेतृत्व ने 1947 में भारत 1947 में भारत के साथ जाने का जो फैसला लिया वह गलत साबित हो गया भारत ने जम्मू-कश्मीर की आवाम से से से की आवाम से से किया वादा तोड़ दिया |वही उमर अब्दुल्ला ने इसके खतरनाक नतीजे भुगतने की चेतावनी दी उन्होंने कहा फैसले के बहुत खतरनाक नतीजे होंगे राज्य की आवाम गुस्से में है पिछले कुछ दिनों से घाटी में दहशत का माहौल बनाना शुरू कर दिया था सरकार ने झूठ बोला कि कुछ बड़ा नहीं चल रहा है| सरकार के इस ऐलान के बाद कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश में चारों तरफ जश्न का माहौल देखा गया लोगों ने मिठाइयां बांटी पटाखे फोड़े अबीर गुलाल लगाकर एक दूसरे को बधाइयां दी संसद में सोमवार सुबह कश्मीर से जुड़े बिल व संकल्प दृढ़ता से पेश करने पर गृह मंत्री अमित शाह को भाजपा सांसदों ने खड़े होकर उन्हें सलामी दी वही शाम को बिल पारित होने पर सदन में मौजूद प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी पीठ थपथपा कर उन्हें शाबाशी दी इस बिल के पास होने पर अब जम्मू कश्मीर या लद्दाख में बाहरी लोग भी संपत्ति खरीद सकेंगे नौकरी कर सकेंगे मतदान कर सकेंगे और चुनाव भी लड़ सकेंगे शिक्षा व सूचना का अधिकार सहित हर कानून व दंड संहिता जम्मू कश्मीर और लद्दाख पर भी लागू होगी सुप्रीम कोर्ट के सभी फैसले उन पर लागू होंगे महिलाओं पर बना पर्सनल कानून बेअसर होगा अब तक कानून-व्यवस्था सीएम के जिम्मेदारी थी लेकिन अब वह सीधे केंद्र के अधीन होगी और गृहमंत्री उपराज्यपाल के जरिए इसे संभालेंगे प्रशासनिक कार्यों के लिए सरकार को उपराज्यपाल से मंजूरी लेनी होगी जम्मू कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल 6 साल की जगह 5 साल का होगा|

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