बस एक कदम और तीन तलाक से तलाक:-

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बस एक कदम और तीन तलाक से तलाक:-

बस एक कदम और तीन तलाक से तलाक:- मंगलवार को राज्यसभा से तीन तलाक बिल पास होते ही संसद ने इतिहास रच दिया ,26 जुलाई को लोकसभा से पारित होने के मात्र 4 दिन बाद ही तीन तलाक से जुड़े मुस्लिम महिला विधेयक को राज्यसभा ने मंगलवार को पास कर दिया, उच्च सदन में लगभग साढे 4 घंटे तक चली चर्चा के बाद हुई वोटिंग में बिल के पक्ष में 99 मत पड़े जबकि विरोध में 84 मत ,कुछ दलों के सदन से बहिर्गमन के कारण सरकार का इस बिल को पास कराने में काफी सहूलियत, मिली जनता दल यू, टीआरएस अन्नाद्रमुक और बसपा जैसे दलों के वाक आउट ने और टीडीपी, वाई एस आर व एनसीपी सांसदों के सदन से गायब रहने से सरकार को विधेयक आसानी से पारित कराने में सहूलियत मिली, अब बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा जिनकी मुहर के बाद तीन तलाक कानूनन अपराध बन जाएगा, इस बिल पर सरकार को तीसरी कोशिश में यह कामयाबी मिली है यह बिल पहले भी दो बार संसद में पारित कराने की कोशिश की गई थी, इससे पहले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल पर विपक्ष की आपत्तियों का जवाब देते हुए कहा कि दहेज विरोधी कानून और बहु विवाह रोकने से जुड़े कानून में भी दोषी हिंदू पुरुष को जेल का प्रावधान है ,लिहाजा तीन तलाक के दोषी को सजा दिलाना गलत नहीं, यह लैंगिक समानता और नारी सम्मान का मामला है तीन तलाक बोल कर बेटियों को छोड़ दिया जाता है इसे किसी भी हाल में सही नहीं ठहराया जा सकता, प्रसाद ने कहा 20से अधिक इस्लामिक देशों में तीन तलाक पर पाबंदी है ऐसे में भारत में लागू नहीं रह सकता इसे वोट बैंक के तराजू पर न तौला जाए यह नारी न्याय गरिमा व सम्मान का सवाल है ,बेटियां फाइटर प्लेन उड़ा रही हैं ऐसे में तलाक पीड़ित बेटियों को फुटपाथ पर नहीं छोड़ा जा सकता, इस बिल में बिना वारंट गिरफ्तारी और दोषी को 3 साल की सजा का प्रावधान है ,हालांकि मजिस्ट्रेट आरोपी को जमानत दे सकते हैं पर ऐसा तभी संभव है जब पीड़ित महिला का पक्ष सुन लिया जाए, पीड़ित महिला अपने बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांग सकती है ,यह बिल राज्यसभा से पास होते ही मुस्लिम महिलाओं में खुशी की लहर दौड़ पड़ी उन्होंने ढोल नगाड़े बजाए और मिठाइयां भी बांटी सहारनपुर की वकील और तीन तलाक पीड़िता फराह फैज ने कहा कि “मुस्लिम महिलाएं अब मुक्त हो गई अब किसी की दादागिरी नहीं बल्कि कानून का राज चलेगा तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई के दौरान मेरा विरोध भी हुआ लेकिन मैं घबराई नहीं आखिर वह दिन आ गया जब कई साल का संघर्ष अपने मुकाम पर पहुंच गया केंद्र सरकार बधाई की पात्र है” वही सहारनपुर की एक अन्य पीड़िता आतिया ने कहा ,अब मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिलेगा राज्यसभा में भी बिल पास होने से मुझे खुशी मिली जिसके लिए लंबे समय से इंतजार कर रही थी मुस्लिम महिलाओं पर तीन तलाक ठोकर नाइंसाफी की जा रही थी इसके लिए केंद्र सरकार बधाई की पात्र है जिसने मुस्लिम महिलाओं की पीड़ा को समझा, वहीं कई लोगों ने इसे इस्लाम के विरुद्ध बताया इन लोगों का कहना है कि यह मुस्लिम शरीयत के खिलाफ है यदि पीड़ित महिला के पति को 3 साल का जेल हो जाएगा तो उसका गुजारा भत्ता कौन देगा, मामले की याचिकाकर्ता निदा खान ने कहा ,जिन मौलानाओं ने हमारा विरोध किया फतवे लगाए उनके लिए मुंहतोड़ जवाब है ,आगे भी तीन तलाक का फायदा उठाकर औरतों पर जुल्म करने वाले मौलानाओं के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी, तीन तलाक बिल पास होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया” देश के लिए ऐतिहासिक दिन है मध्यकालीन कुप्रथा को इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया, हमने इतिहास की गलतियों को सुधारा है करोड़ो मुस्लिम माताओं बहनों की जीत हुई है और उन्हें सम्मान से जीने का हक मिला है “|वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा “अन्याय पूर्ण परंपरा के प्रतिबंध पर संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी हो गई, महिला पुरुष समानता के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है देश के लिए संतोष का पल”| वही अमित शाह ने कहा ,यह लोकतंत्र के लिए महान दिन है मैं पीएम नरेंद्र मोदी को बधाई देता हूं उन्होंने तीन तलाक पर रोक के लिए प्रतिबद्धता दिखाई इससे महिलाओं को एक कुप्रथा से आजादी मिलेगी इस ऐतिहासिक बिल का समर्थन करने वाले सभी दलों का मैं आभार प्रकट करता हूं “|वही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा भारत के संसदीय इतिहास का यह गौरवशाली दिन है इस बिल का पारित होना केवल किसी मजहब या जाति के लिए नहीं बल्कि नारी गरिमा और उनका सम्मान की रक्षा के लिए आवश्यक था संविधान में किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव को स्थान नहीं दिया गया है महिला पुरुष के बीच भेदभाव को खत्म करने के लिए यह बिल जरूरी था| राज्यसभा में तीन तलाक बिल पर विपक्ष की रणनीति और मोदी सरकार को घेरने का एकीकरण मंत्र उल्टा पड़ गया डीएमके और आम आदमी पार्टी को छोड़कर सभी विपक्षी पार्टियों के 59 सदस्यों ने सदन से गैर हाजिर होकर बिल पास कराने में सरकार का रास्ता साफ कर दिया राज्यसभा में 48 सांसदों वाली कांग्रेस के अपने पांच सदस्य इतने महत्वपूर्ण मौके पर उसके साथ नहीं हुए वही, इस बिल पर सरकार के सहयोगी दलों में जदयू अन्नाद्रमुक और टीआरएस ने मतदान में विरोध से बचने के लिए सदन से वाक आउट किया वहीं सपा के 12 सदस्यों में से सिर्फ पांच सदस्यों ने ही मतदान में हिस्सा लिया|

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