सुप्रीम कोर्ट का नागरिकता कानून पर रोक नहीं:-

सुप्रीम कोर्ट का नागरिकता कानून पर रोक नहीं:- सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून सीएए और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर एनपीआर पर तुरंत प्रभाव से क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दाखिल 144 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया कि बिना केंद्र सरकार को सुनें वह वह कोई रोक नहीं लगा सकता है,

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है चीफ जस्टिस एसए बोबडे जस्टिस, एस अब्दुल नजीर व जस्टिस संजीव खन्ना की तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा यह मामला लोगों के दिमाग में सबसे ऊपर है, सरकार का जवाब मिलने के बाद ही इस पर सुनवाई होगी, कोर्ट ने मामले में किसी भी हाईकोर्ट को आदेश देने से भी रोक लगा दिया ,

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा उत्तर प्रदेश में सीएए के तहत नागरिकता देने की शुरुआत हो गई है 40000 ऐसे लोगों की पहचान की गई है जिनको जिनको नागरिकता दी जानी है, ऐसा गलत कदम ना उठाया जाए जिसे वापस वापस लेना संभव हो ,लिहाजा इस पर तत्काल प्रभाव से कोर्ट को रोक लगाना चाहिए, जिस पर सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने कहा बिना केंद्र सरकार का पक्ष सुने हुए वह इस पर रोक नहीं लगा सकते ,

कोर्ट ने नागरिकता कानून को लेकर दाखिल याचिकाओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांट दिया है, असम और त्रिपुरा के मामले में कोर्ट ने कहा कि इसे अलग से निपटाया जाएगा, कोर्ट ने दोनों राज्यों के मामले में जवाब देने के लिए केंद्र को दो हफ्ते का समय दिया ,केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा 18 दिसंबर को पिछली सुनवाई के बाद 84 नई याचिकाएं दायर हुई हैं ,हम 60 याचिकाओं का जवाब दे चुके हैं, बाकी का जवाब देने के लिए अभी हमें 6 हफ्ते का और समय चाहिए लेकिन कोर्ट ने उन्हें सिर्फ 4 हफ्ते का ही समय दिया ,वेणु गोपाल के इस माग को भी कोर्ट ने ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने कहा कि और याचिकाएं लगाने पर कोर्ट को रोक लगा देनी चाहिए, कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इस मामले को 5 सदस्यी संविधान पीठ को भेजा जा सकता है,

सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में खचाखच भीड़ भरी हुई थी जिसकी वजह से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद और विकास सिंह को भी आगे पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, इस पर बेणुगोपाल ने कहा ऐसे माहौल में सुनवाई मुश्किल है बहस के लिए शांति का माहौल होना चाहिए जिसका अन्य वकीलों ने भी समर्थन किया, इस पर सीबीआई ने कहा कि वह इसका समाधान निकालने की कोशिश करेंगे, कोर्ट में बलूचिस्तान हिंद पंचायत की तरफ से सीएए के समर्थन में याचिका दायर की गई है इसमें कहा गया है गया है पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश में मुस्लिम न तो अल्पसंख्यक हैं और ना ही उनके ही उनके साथ धर्म के आधार पर उनका उत्पीड़न होता है, यह संस्था प्रताड़ना से परेशान होकर भारत में आए लोगों के लिए संरक्षण का काम करती है,

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