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गांधी @150: मोहन से महात्मा तक:-

गांधी @150: मोहन से महात्मा तक:-महात्मा गांधी के आज 150वीं जयंती पर पूरा देश एक नए क्रांति की शुरुआत कर रहा है आज पूरे देश को सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्ति दिलाने की मुहिम शुरू हो रही है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में इस अभियान की शुरुआत आज महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर शुरू की, सिंगल युज़ प्लास्टिक के दुष्प्रभाव और पर्यावरण पर इसके नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए युज़ प्लास्टिक से दुनिया को मुक्त कराने की शुरुआत की,

भारत में शुरू अभियान को इसे जन आंदोलन में बदल सिंगल यूज़ प्लास्टिक से बचने की शुरुआत हुई, महात्मा गांधी भले ही भारतीय थे लेकिन उनके विचारों आदर्शों को पूरा पूरा विश्व आनुसरण कर रहा है, उनके अहिंसा परमो धर्म का मंत्र सदियों पुराने साम्राज्य को न सिर्फ झकझोर दिया बल्कि असंख्य देशभक्तों में आजादी की ललक जगा दिया ,महात्मा गांधी ऐसे ही व्यक्ति थे जिनकी सत्ता से दूर रहने के बावजूद भी आज वह करोड़ों के दिलों पर राज कर रहे हैं, गांधी जी ही ऐस व्यक्ति रहे जिनसे वह कभी मिले नहीं लेकिन वह इन लोगों के दिलों पर राज करते हैं ,चाहे वह मार्टिन लूथर किंग जूनियर हो या नेल्सन मंडेला ,उनके विचारों का आधार महात्मा गांधी थे ,गांधी जी का विजन था ,आज लोकतंत्र की परिभाषा का एक सीमित अर्थ रह गया है जनता अपनी पसंद की सरकार चुनें और सरकार जनता की अपेक्षा के अनुसार काम करें ,लेकिन महात्मा गांधी ने लोकतंत्र की असली शक्ति पर बल दिया था उन्होंने वह दिशा दिखाई जिससे लोग शासन पर निर्भर न हो और स्वावलंबी बने ,

महात्मा गांधी भारत की आजादी की लड़ाई एक केंद्र बिंदु थे आज से 150 वर्ष पूर्व गुजरात के अहमदाबाद के पास साबरमती के एक छोटे से स्थान पर जल में गांधी ने अपने विचारों और आदर्शों से एक ऐसा स्थान बना दिया जिसे पूरे देश उनके आदर्शों को आजमाया, उन्होंने सत्य और अहिंसा की वकालत की थी और इसी के दम पर उन्होंने भारत को आजादी दिलाने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की,

महात्मा गांधी की मान्यता के दो ध्रुव बिंदु हैं अहिंसा और सत्य सत्य का प्रयोगात्मक रूप ही उनके अनुसार हिंसा और अहिंसा का अविचल रूप ही सत्य है वह सत्य को सत्य मानते थे अहिंसा को साधन उन्होंने लिखा है साधन अपने हाथ की बात है इससे अहिंसा परम धर्म मानी गए सत्य परमेश्वर हुआ अहिंसा का मार्ग जितना सीधा है उतना कठिन भी तलवार की धार पर चलने के समान है गांधी जी का कहना था कि मनुष्य के पास अहिंसा सबसे बड़ा हथियार है इंसान की सारी योग्यता और बुद्धि द्वारा बनाए गए विनाश और मौत के सारे ताकतवर हथियारों से भी यह ज्यादा शक्तिशाली और घातक है अहिंसा और कायरता परस्पर विरोधी शब्द का मूल मंत्र प्रेम और कायरता का घृणा|

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