राजनीति वह फिल्म जगत की दो हस्तियों का निधन:

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राजनीति वह फिल्म जगत की दो हस्तियों का निधन:

राजनीति वह फिल्म जगत की दो हस्तियों का निधन:

राजनीति वह फिल्म जगत की दो हस्तियों का निधन:- सोमवार 19 अगस्त को दो हस्तियों ने इस संसार से विदा लिया इसमें से एक फिल्म जगत की व दूसरी राजनीति से संबंधित है, बिहार के तीन बार सीएम रहे जगन्नाथ मिश्र का सोमवार को दिल्ली में निधन हो गया वह 82 वर्ष के थे ,उन्हें ब्लेंडर कैंसर था बिहार की राजनीति में कांग्रेस के वह अंतिम मुख्यमंत्री थे ,1990 में 324 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को मात्र 71 सीटें मिली थी , उसके बाद कांग्रेश कभी भी इस आंकड़े को अब तक पार नहीं कर पाई ,मिश्र1975 से 1990 के बीच तीन बार मुख्यमंत्री रहे उनके बिहार से मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद बिहार की सत्ता में कांग्रेश कभी भी इस आंकड़े से आगे नहीं बढ़ पाई , जगन्नाथ मिश्र बिहार विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के टीचर थे और वह कांग्रेस से जुड़े 1975 में इंदिरा गांधी के खास तत्कालीन रेल मंत्री मंत्री और ललित नारायण मिश्रा के एक धमाके में निधन के बाद उन्हें पहली बार बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया, राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेसमें उनकी दूरियां बढ़ी और उन्हें हटाकर चंद्रशेखर मुख्यमंत्री बनाया गया 1982 में प्रेस बिल को लेकर भी, जगन्नाथ मिश्र को विरोध सहना पड़ा था ,उनके निधन पर सोनिया गांधी ने ट्वीट किया “कांग्रेश से तीन बार मुख्यमंत्री रहे जगन्नाथ मिश्रा अल्पसंख्यकों और कमजोर तबके के हितों को लेकर आगे बढ़े और दृढ़ होकर उनके साथ खड़े रहे उनके साथ खड़े रहे उन्हें लंबे समय तक याद किया जाएगा”|

वही फिल्म जगत से खय्याम नाम से मशहूर संगीतकार मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी का सोमवार को रात करीब 9:30 बजे दिल का दौरा पड़ने के कारण मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया, वह 92 साल के थे ,वह कुछ समय से फेफड़े के संक्रमण से पीड़ित थे और अस्पताल में पिछले हफ्ते उन्हें सांस लेने की दिक्कत होने के कारण भर्ती कराया गया|

पद्मभूषण से सम्मानित खय्याम ने , बॉलीवुड कैरियर की शुरुआत 1953 में फिल्म फुटपाथ से की थी |1961 में फिल्म शोला और शबनम के संगीत से खय्याम को पहचान मिला , उन्होंने कभी-कभी, हीर रांझा रांझा और उमराव जान जैसी कई हिट फिल्में दी, आखरी खत, त्रिशूल ,नूरी , बाजार, यात्रा जैसी फिल्मों में संगीत देकर उन्होंने एक नया पहचान दिया, फिल्मों में उनके इस अभूतपूर्व योगदान के लिए पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया ,उन्हें उमराव जान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और कभी-कभी के लिए फिल्म फेयर फेयर पुरस्कार दिया गया ,उनके निधन पर फिल्म जगत की तमाम हस्तियों ने शोक व्यक्त किया भारत रत्न लता मंगेशकर ने कहा खय्याम साहब के साथ संगीत के एक युग का अंत हो गया ,वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताते हुए कहा” खय्याम साहब ने अपनी यादगार धुनों से अनगिनत गीतों को अमर बना दिया उनके अप्रतिम योगदान के लिए फिल्म और कला जगह हमेशा उनका कर्जदार रहेगा”| बहारों मेरा जीवन भी सवारों राजेश खन्ना की पहली फिल्म आखिरी खत के लिए उन्होंने कंपोज किया वही कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है को उन्होंने फिल्म कभी कभी के लिए इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं ,उमराव जान के लिए उन्होंने इस गाने को कंपोज की ऐसी बहुत सारी फिल्मों और सदाबहार गाने जिन पर खय्याम साहब की छाप नजर आती

है, वह शुरू में हीरो बनने के लिए प्रयास किए और कुछ दिनों तक प्रयास करने के बाद यह ख्याल अपने दिल से निकाल कर संगीत की तरफ उनका झुकाव हो गया|

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