राम मंदिर मामला :सुनवाई पूरी अब फैसला होगा:-

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राम मंदिर मामला :सुनवाई पूरी अब फैसला होगा:-

राम मंदिर मामला :सुनवाई पूरी अब फैसला होगा:- देश की सबसे बड़ी अदालत में चल रहे हैं देश के सबसे बड़े मुकदमे पर जीरह आखिरकार पूरी हो गई ,सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर अपना फैसला सुनाने के लिए जिरह पूरी कर ली ,मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ अब देश के सबसे चर्चित और पुराने मामले पर बुधवार शाम 5:00 बजे तक अपनी सुनवाई पूरी करने की सीमा रखी थी लेकिन 1 घंटे पहले ही शाम 4:00 बजे यह सुनवाई पूरी हो गई,
कोर्ट ने इस संबंध में दोनों पक्षों को मोल्डिंग आफ रिलीफ राहत में बदलाव के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिए 3 दिन का और समय दिया है, इसमें दोनों पक्षों की ओर से अपील के दौरान किए दावों पर नरमी की गुंजाइश देखी जाती है, हालांकि यह देखने वाली बात होगी कि मोल्डिंग ऑफ रिलीफ सिद्धांत किस हद तक लागू किया जा सकता है, संविधान पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि अब मौखिक बहस नहीं होगी ,
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहा है इसलिए इस मामले पर उनसे यह फैसला 17 नवंबर तक आने की उम्मीद है ,सुनवाई के आखिरी दिन हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष को समय दिया गया था हिंदू पक्ष की तरफ से दलील में हिंदू पक्ष ने कहा की मुस्लिम पक्ष साबित नहीं कर पाया कि मस्जिद बाबर ने बनवाई और वह जमीन हम मांग रहे हैं जहां अवैध निर्माण हुआ था, हिंदू पक्ष ने दलील देते हुए कहा कि रामजन्मभूमि पर हमेशा से मंदिर ही था मस्जिद के यहां कोई सबूत नहीं है पूजा के यहां पर ऐतिहासिक सबूत हैं 16 मी सदी में आए विदेशी यात्रियों के वृत्तांत में मंदिर का तो जिक्र है पर मस्जिद का नहीं वही ब्रिटिश गैजेटियर में भी राम मंदिर का ही जिक्र है मुस्लिम पक्ष के पास कब्जे को लेकर कोई अधिकार नहीं है लेकिन रामलला पक्ष के पास इसके सबूत हैं रामलला विराजमान की तरफ से वैद्यनाथन ने दलीलें रखी उन्होंने कहा कि छोटी सी जगह में ही मुस्लिम पक्ष बटवारा चाहता है उन्होंने कहा हिंदू लगातार पूजा करते आ रहे थे लेकिन बाद में मुगलों ने जबरन मस्जिद बना दी थी जब जमीन की मालिक हुकूमत थी और उन्हीं की देखरेख में मस्जिद बनाई तो सुननी बोर्ड ने उसे कैसे डेडीकेट किया उन्होंने कहा कि इस बात के भी प्रमाण है कि 16 दिसंबर 1949 के बाद विवादित स्थल पर कोई नमाज अदा नहीं की गई 22 23 दिसंबर की रात से रामलला विराजमान थे वही मुस्लिम पक्ष ने इस पर दलील देते हुए कहा कि यहां पर विध्वंस के पहले वाली स्थिति बहाल होने चाहिए, सुनवाई के दौरान अखिल भारतीय हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने अदालत में एक नक्शा देते हुए कहा कि वह इसके जरिए सटीक जन्मस्थान बताना चाहते हैं जो बीच वाले गुंबद के नीचे था ,नक्शा पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल की किताब अयोध्या रिविजिटेड से लिया गया था, इसका विरोध करते हुए सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने इसका विरोध किया और भरी अदालत में उन्होंने इस नक्शे के 5 टुकड़े कर दिए ,इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा आप चाहे तो पूरे पेज फाड़ सकते हैं, अगर ऐसे चलता रहा तो सुनवाई अभी पूरी कर दी जाएगी फिर जिसे भी दलील देनी हो वह लिखित में ली जाएगी, बाद में धवन ने सफाई दी मैं नक्शा फेकना चाहता था पर सीजेआई कहा कि आपको टुकड़े कर सकते हैं इसलिए मैंने टुकड़े कर दिया ,बाद में उनके इस हरकत पर हिंदू महासभा ने बार काउंसिल में धवन लिखित शिकायत दर्ज कराई
इस तरह से देश के सबसे बड़े और पुराने 134 साल की मुकदमा बाजी के बाद नई सुबह की उम्मीद राम नगरी में हो रही है 1885 में जिला न्यायालय से शुरू हुआ या केस अब अपने फैसले की तरफ अंतिम कदम बढ़ा दिया है|

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